ज़ख्मी शायरी | Sad Shayari | दिल को छु लेने वाली शायरी

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zakhmi dil shayari
हसीनों को करीब से देखा है इनके पास बेवफाई है,
जिन्होंने प्यार किया है उन्होंने अपनी कवर बनाई है।
कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने हमसे बात करना,
जैसे हम सदियों से तुम पर बोझ थे।
तमाम जख्मों के साथ इसलिए जी रहा हूं,
कि 1 दिन तो वो शख्स जरूर मिलेगा जो मरहम लगाना जानता है।
बहुत रुलाया है इन बेवफा लोगों ने,
ए मौत अगर तुम साथ दो तो सबको रुलाने का इरादा है मेरा।
इतना खुश रखूंगा तुझे की दर्द भूल जाएगी,
इतना प्यार करूंगा तुझे कि जिंदगी कम पड़ जाएगी।
मत चाहो किसी को इतना कि बाद में रोना पड़े,
क्योंकि यह दुनिया दिल से नहीं जरूरत से प्यार करती है।
यह जिंदगी हर रोज एक नया सबक सिखाती है,
पत्थर को तराश कर हीरा बनाती है।
तेरा और मेरा इतना ही किस्सा है,
कि तू मेरे दर्द का सबसे अहम हिस्सा है।
नाराज क्यों होते हो चले जाएंगे तुम्हारी जिंदगी से बहुत दूर,
जरा टूटे हुए दिल के टुकड़ेे तो उठा लेनेे दो
उन्हें चाहना हमारी कमजोरी है,
उनसे कह नहीं पाना हमारी मजबूरी है,
वह क्योंंंं नहीं समझते हमारी खामोशी को,
क्या प्यार का इजहार करना जरूरी है।
कितना नादान है मेरा दिल कैसे समझाऊं,
जिसे यह खोना नहीं चाहता वह इसका होना नहीं चाहता।
जख्म देकर ना पूछा करो तुम दर्द की शिद्दत,
दर्द तो दर्द होता हैै थोड़ा क्या और ज्यादा क्या।
उसके दिल में थोड़ी सी जगह मांगी थी मुसाफिर की तरह,
उसने तो तनहाइयों का पूरा शहर ही मेरे नाम कर दिया।
मैं हाथ थाम सकू उसका मुझ पर ऐसी रहमत सी कर दे,
वो रह ना पाए मेरे बिन ए खुदा तू उसको मेरी आदत सी कर दे
कुछ टूटे तो उसे सजाना सीखो,
कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो,
रिश्ते मिलते हैं बहुत नसीब से,
इसलिए उन्हे खूबसूरती से निभाना सीखो।
हाथ जख्मी हुए तो कुछ हमारी भी गलतियां थी,
लकीरों को मिटाने चले थे किसी एक को पाने के लिए।
तैयार रहना यह दिल,
फिर कोई जख्म मिलेगा कुछ लोग फिर पेश हो रहे हैं बहुत प्यार से।
बिछड़ने का तो वह पहले से ही इरादा कर चुकी थी,
उसे तो बस मेरी तरफ से कोई बहाना चाहिए था।
बड़े सुकून से रहता है अब वह मेरे बिना,
जैसे किसी उलझन से छुटकारा मिल गया हो।
कमबख्त अपना दिल क्या टूटा,
किस सारे शहर को बारिश में भीगा दिया।
लोग कहते हैं पिए बैठा हूं,
मैं खुद को मदहोश किए बैठा हूं,
ये जान बची है ये भी ले लीजिये,
दि तो पहले ही दिये बैठा हूं।
छोड़ दो उसकी वफा की आस,
वह रुला सकता है तो भुला भी सकता है
मैं क्या किसी को रास्ता दिखाऊंगा,
मैं तो खुद भटक रहा हूं मंजिल की तलाश में
नाराज करने वाले तेरी कोई खता नहीं,
मोहब्बत क्या होती है शायद तुझे पता नहीं
यूं तो सदमे में भी हंस लेता था मैं,
आज क्यों बेवजह रोने लगा हूं मैं।
चेहरा देखकर इंसान पहचानने की कला थी मुझ में, त
कलीफ तो तब बहुत हुई जब इंसानों के पास चेहरे बहुत थे
तू क्या जाने किस दर्द में हूं,
जो लिया नहीं उस कर्ज में हूं
मोहब्बत का मेरा यह सफर आखिरी है,
यह कागज यह कलाम यह ग़ज़ल आखरी है,
फिर ना मिलेंगे अब तुमसे हम कभी,
क्योंकि तेरे दर्द का अब यह सितम आखिरी है।
जिनकी याद में हम दीवाने हो गए,
वह हमसे ही बेगाने हो गए,
शायद उन्हें तालाश से नहीं प्यार की,
क्योंकि उनकी नजर में हम पुराने हो गए।
दुखिया नहीं के दर्द मुझे मार देगा,
दुख तो यह है कि दर्द मुझे जीने नहीं देता।
ज़ख्म ही देना था तो पूरा जिस्म तेरे हवाले था,
लेकिन कमबख्त ने जब भी वार किया दिल पर ही किया।
बड़े घर की लड़की की थी,
छोटे से दिल में कैसे रहती है

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