सत्तू पराठा बनाने की आसान और क्विक विधि : सुबह की शुरुआत अगर सत्तू पराठे से हो जाए, तो दिन भर की एनर्जी पक्की है। बिहार के हर घर में नाश्ते की शान कहे जाने वाले इस पराठे का स्वाद ही कुछ और है। ज़रा सोचिए—गरम-गरम तवे पर सेंका हुआ, ऊपर से देसी घी लगा हुआ पराठा, जिसके अंदर भुने चने के आटे (सत्तू) का मसालेदार मिश्रण भरा हो। साथ में अचार, दही या प्याज-नींबू की सलाद… मुँह में पानी आ गया न?
सत्तू पराठा सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई इलाकों में भी बेहद पसंद किया जाता है। यह एक ऐसा व्यंजन है जो स्वाद, सेहत और सस्ते दाम—तीनों चीज़ों को एक साथ पूरा करता है। तो आइए, इस अद्भुत व्यंजन के बारे में हर छोटी-बड़ी बात जानते हैं।
Read Also : लिट्टी-चोखा बनाने की असली और आसान विधि – बिहारी स्टाइल स्टेप बाय स्टेप
सत्तू पराठा बनाने की आसान और क्विक विधि

सत्तू क्या है और यह क्यों खास है?
सत्तू को बिहार का सुपर फूड कहा जाता है। यह भुने हुए काले चने या चने को दरदरा पीसकर बनाया जाता है। पुराने ज़माने में इसे पत्थर की चक्की पर पीसा जाता था, लेकिन अब बाजार में पैक्ड सत्तू आसानी से मिल जाता है।
सत्तू की खासियत:
- यह कच्चा नहीं होता, क्योंकि इसे बनाने से पहले चने को अच्छी तरह भून लिया जाता है।
- इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए गर्मियों में यह शरीर को ठंडक पहुँचाता है।
- इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
- सत्तू को बिना पकाए भी खाया जा सकता है (जैसे सत्तू का शरबत), लेकिन पराठे में भरकर इसे पकाने से इसका स्वाद और भी निखर जाता है।
सत्तू पराठा का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व
सत्तू पराठा का इतिहास बिहार की किसान संस्कृति से जुड़ा है। पुराने समय में खेतों में काम करने वाले किसान सुबह जल्दी उठकर सत्तू पराठा खाते थे, क्योंकि यह दिनभर पेट भरा रखने वाला भोजन था। यही कारण है कि इसे “किसानों का ब्रेकफास्ट” भी कहा जाता है।
यात्रियों का साथी:
बिहारी लोग जब लंबी यात्रा पर निकलते थे, तो वे सत्तू पराठा साथ लेकर चलते थे। यह 2-3 दिनों तक बिना खराब हुए रहता है और बिना गरम किए भी खाया जा सकता है। इसीलिए इसे एक प्राचीन ट्रैवल फूड भी कह सकते हैं।
त्योहारों में स्थान:
हालाँकि सत्तू पराठा एक रोजमर्रा का व्यंजन है, लेकिन शनिवार या रविवार के नाश्ते में या किसी छोटे-मोटे त्योहार पर इसे ज़रूर बनाया जाता है। कई बिहारी घरों में मेहमान आने पर भी उन्हें सत्तू पराठा खिलाकर सम्मान दिया जाता है।
सत्तू पराठा बनाने की विधि
चलिए, अब जानते हैं कि घर पर हलवाई जैसा सत्तू पराठा कैसे बनाया जाता है। मैंने इसे स्टेप बाय स्टेप और बहुत आसान भाषा में समझाया है।
पराठे के आटे के लिए सामग्री
- गेहूं का आटा – 2 कप (लगभग 250 ग्राम)
- नमक – ½ छोटा चम्मच
- देसी घी या तेल – 1 बड़ा चम्मच (आटा गूंथने के लिए)
- गुनगुना पानी – आवश्यकतानुसार
सत्तू भरावन के लिए सामग्री
(यह भरावन ही पराठे की जान है)
- सत्तू (भुना चना आटा) – 1 कप
- बारीक कटा हुआ प्याज – 1 (मध्यम आकार का)
- बारीक कटी हरी मिर्च – 2 (अपनी मर्जी के अनुसार)
- बारीक कटा हरा धनिया – 2 बड़ा चम्मच
- अदरक – 1 इंच (कद्दूकस किया हुआ)
- लहसुन – 3-4 कलियाँ (बारीक कटा या कद्दूकस)
- अजवाइन – ½ छोटा चम्मच
- सौंफ – ½ छोटा चम्मच (कूटा हुआ)
- अचार का मसाला या चाट मसाला – 1 छोटा चम्मच
- नींबू का रस – 1 बड़ा चम्मच
- कच्ची सरसों का तेल – 2 बड़ा चम्मच (इससे असली बिहारी स्वाद आता है)
- नमक – स्वादानुसार
बनाने की पूरी विधि
चरण 1: आटा गूंथना : एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा, नमक और 1 बड़ा चम्मच घी डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। अब इसमें थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी डालकर मुलायम और चिकना आटा गूंथ लें। याद रखें, पराठे का आटा रोटी के आटे से थोड़ा नरम होना चाहिए, ताकि बेलते समय फटे नहीं। आटे को 15-20 मिनट के लिए ढककर रख दें।
चरण 2: सत्तू का मसाला मिश्रण तैयार करें : एक बर्तन में सत्तू, कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, अदरक-लहसुन, अजवाइन, सौंफ, चाट मसाला, नमक और कच्ची सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। इसके बाद इसमें नींबू का रस मिलाएँ।
टिप: सत्तू को कभी भी सूखा न भरें। उसमें प्याज या तेल की नमी होनी चाहिए, ताकि पराठा बनाते समय वह अंदर से पक जाए और सूखा न लगे। अगर मिश्रण ज्यादा सूखा लगे तो एक चम्मच पानी या तेल और डाल सकते हैं।
चरण 3: पराठे में भरावन भरना
- गूंथे हुए आटे को बराबर-बराबर लोइयाँ (गोल गेंद) बना लें।
- एक लोई को हल्का सा बेलकर उसके बीच में 1 बड़ा चम्मच सत्तू का मिश्रण रखें।
- अब इसके किनारों को ऊपर उठाकर बीच में दबाएँ और पूरी तरह से गोल आकार दे दें (जैसे आलू का पराठा बनाते हैं)।
- ध्यान रखें, भरावन किनारों से बाहर न निकले, नहीं तो बेलते समय पराठा फट जाएगा।
चरण 4: बेलना और सेंकना
- भरी हुई लोई पर हल्का सूखा आटा लगाकर इसे बेलन से हल्के हाथों से गोल-गोल बेलें। ज्यादा जोर से न बेलें, वरना भरावन बाहर आ जाएगा।
- तवा गरम करें और उसे हल्का सा तेल/घी लगाकर चिकना करें।
- बेले हुए पराठे को तवे पर डालें। जब नीचे की तरफ हल्की भूरी पपड़ी बन जाए, तो पलट दें।
- दोनों तरफ ब्रश या चम्मच से घी या तेल लगाते हुए सेंकें। जब पराठे पर दोनों तरफ सुनहरी-भूरी कुरकुरी परत बन जाए और वह फूल जाए, तो समझ लें कि पराठा बनकर तैयार है।
सत्तू पराठा का सही तरीका और वैरिएशन
हालाँकि ऊपर वाली रेसिपी नमकीन (साल्टेड) सत्तू पराठे की है, लेकिन बिहार में इसे दो तरह से खाया जाता है:
नमकीन सत्तू पराठा (जो हमने ऊपर बनाया)
- यह मसालेदार होता है।
- साथ में आम का अचार, नींबू का अचार या पुदीने की चटनी बेस्ट लगती है।
- कई लोग इसे दही के साथ भी खाते हैं।
मीठा सत्तू पराठा
- इसमें सत्तू में नमक और मिर्च नहीं डाली जाती।
- इसके बजाय, सत्तू में गुड़ (शक्कर) या चीनी, इलायची पाउडर और सौंफ मिलाकर भरावन तैयार किया जाता है।
- इसे मीठी चटनी या दूध के साथ खाया जाता है।
- बच्चों को यह वर्जन बहुत पसंद आता है।
प्याज-अदरक वाला हेल्दी वर्जन
- अगर आप स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं, तो सत्तू में तेल कम डालें और उबले हुए मैश किए आलू के साथ मिलाकर पराठा बनाएँ। इससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और कैलोरी भी कंट्रोल में रहती है।
पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभ
सत्तू पराठा सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को ताकत देने के लिए है।
पोषक तत्व (एक मीडियम सत्तू पराठे में लगभग)
| पोषक तत्व | मात्रा |
| कैलोरी | 180-220 किलो कैलोरी |
| प्रोटीन | 7-8 ग्राम |
| फाइबर | 5-6 ग्राम |
| कार्ब्स | 30 ग्राम |
| कैल्शियम | 50 मिग्रा |
| आयरन | 2.5 मिग्रा |
फायदे (Benefits)
1. डायबिटीज (मधुमेह) में फायदेमंद: सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है। यह डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा है।
2. वजन घटाने में मददगार: इसमें मौजूद उच्च फाइबर भूख को कंट्रोल करता है, जिससे आप ज्यादा नहीं खाते और वजन कम करने में मदद मिलती है।
3. गर्मियों में ठंडक: सत्तू की तासीर ठंडी होती है, इसलिए गर्मी के मौसम में यह बॉडी को कूल रखता है और लू से बचाता है।
4. एनीमिया से बचाव: इसमें अच्छी मात्रा में आयरन (Iron) होता है, जो खून की कमी को दूर करता है।
5. पाचन तंत्र दुरुस्त: भुने चने का आटा पाचन शक्ति को बढ़ाता है और कब्ज (Constipation) जैसी समस्याओं में आराम देता है।
सत्तू पराठे को परफेक्ट बनाने के 5 सीक्रेट टिप्स
पराठा बनाना सभी जानते हैं, लेकिन बिहारी स्टाइल सत्तू पराठा बनाने के लिए ये टिप्स काम आएँगे:
- आटा मुलायम रखें: जैसा कि बताया, आटा जितना मुलायम होगा, पराठा उतना ही मुलायम बनेगा। सख्त आटे में भरावन डालते ही वह फट जाता है।
- सत्तू को भून लें: अगर बाजार का पैक्ड सत्तू ले रहे हैं, तो उसे पहले शुष्क (dry) कड़ाही में 1-2 मिनट हल्का भून लें। इससे उसकी कच्ची गंध निकल जाती है और स्वाद बढ़ जाता है।
- तेल की मात्रा सही करें: सत्तू बहुत ज्यादा पानी सोखता है, इसलिए भरावन में तेल या नींबू जरूर डालें, वरना पराठे बनते ही अंदर से चोकर (सूखे) लगेंगे।
- बेलते समय हाथ हल्का: भरवां पराठा बेलते समय बेलन को दबाएँ नहीं, हल्के हाथों से गोल करें। ज्यादा दबाने पर भरावन बाहर आ जाता है।
- तवे का तापमान: तवा मध्यम आँच पर होना चाहिए। अगर आँच बहुत तेज़ है, तो पराठा जल जाएगा और अंदर का सत्तू कच्चा रह जाएगा।
सत्तू पराठे के साथ क्या खाएं? (सर्विंग आइडियाज)
अकेला पराठा अच्छा लगता है, लेकिन जब उसे कुछ चीज़ों के साथ खाया जाए, तो स्वाद दोगुना हो जाता है।
| सर्विंग आइटम | क्यों खाएं? |
| दही (Yogurt) | सत्तू की तासीर ठंडी है और दही भी ठंडा, मिलकर पाचन को दुरुस्त करता है। |
| आम का अचार | बिहार के हर घर में आम का तीखा-मीठा अचार होता है, जो पराठे का मज़ा बढ़ा देता है। |
| प्याज-नींबू सलाद | कच्चा प्याज और नींबू का रस मिलाकर खाने से स्वाद में चटपटापन आता है। |
| हरी चटनी | पुदीने या धनिए की ताज़ी चटनी पराठे के साथ क्लियर होती है। |
| गरम चाय | बिहारी नाश्ते में सत्तू पराठे के साथ अदरक वाली गरम चाय पीने का अपना ही मज़ा है। |
निष्कर्ष
सत्तू पराठा सिर्फ एक रेसिपी नहीं, यह बिहारी संस्कृति की पहचान है। सादगी, ताकत और अद्भुत स्वाद—ये तीनों गुण इसमें एक साथ मिलते हैं। चाहे वह सुबह की भागदौड़ हो, ऑफिस के लंच बॉक्स की जरूरत हो, या किसी लंबी यात्रा का साथी—सत्तू पराठा हर जगह और हर मौसम में फिट बैठता है।
FAQs
Q1: क्या सत्तू पराठा वजन कम करने में मदद करता है?
हाँ, इसमें भरपूर फाइबर और प्रोटीन होता है, जो पेट को भरा रखता है और ओवरईटिंग से बचाता है। बस ध्यान रखें कि इसे बनाते समय तेल/घी कम इस्तेमाल करें।
Q2: सत्तू पराठे को बिना तेल के कैसे बनाएं?
आप इसे ग्रील्ड या नॉन-स्टिक तवे पर बिना तेल (ड्राई) भी सेंक सकते हैं। हालाँकि, बिहारी स्टाइल में घी लगाना ही असली स्वाद है, लेकिन डायटर्स ड्राई वर्जन भी आज़मा सकते हैं।
Q3: क्या सत्तू पराठा फ्रिज में रख सकते हैं?
जी हाँ, बनाने के बाद इसे ठंडा होने दें और एयर-टाइट डब्बे में रखकर 2-3 दिन फ्रिज में रख सकते हैं। खाने से पहले तवे पर गरम करें, तवा ही स्वाद बरकरार रखता है, माइक्रोवेव से बचें।
Q4: क्या सत्तू के अंदर ग्लूटेन होता है?
नहीं, सत्तू चने से बनता है, जो ग्लूटेन-फ्री है। लेकिन पराठा गेहूं के आटे से बनता है, इसलिए अगर आपको ग्लूटेन एलर्जी है, तो आप भरावन को सलाद की तरह या ग्लूटेन-फ्री आटा (जैसे ज्वार/बाजरा) के साथ ट्राई करें।
Q5: सत्तू का भरावन सूखा लगता है, क्या करें?
इसे तुरंत ठीक करने के लिए भरावन में 1-2 चम्मच गरम तेल या नींबू डालकर मिलाएँ। नमी आने से सत्तू नरम हो जाता है।









